Indian Festivals 2026

माघ मास: त्रयोदशी से पूर्णिमा तक महापुण्य — रविपुष्यामृत योग और माघी पूर्णिमा के उपाय

माघ मास: त्रयोदशी से पूर्णिमा तक महापुण्य — रविपुष्यामृत योग और माघी पूर्णिमा के उपाय

माघ मास की अंतिम 3 तिथियाँ: क्यों हैं ये दिन इतना खास?

माघ मास हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस मास की हर तिथि पुण्यदायी होती है, लेकिन शुक्ल पक्ष की अंतिम तीन तिथियाँ—त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा—विशेष रूप से महापुण्य प्रदान करने वाली मानी जाती हैं।

यह समय भक्तों के लिए एक सुनहरा अवसर है, क्योंकि जो लोग पूरे महीने नियमित पूजा-उपवास नहीं कर पाते, वे भी इन अंतिम तीन दिनों में पूरे मास का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।

स्कंद पुराण में भी वर्णित है कि माघ मास के अंतिम तीन दिनों में स्नान, व्रत, पूजा और दान करने से व्यक्ति को पूरे माघ मास का फल मिलता है।


माघ मास की अंतिम 3 तिथियों का महापुण्य — त्रयोदशी से पूर्णिमा तक

माघ मास की शुक्ल पक्ष की अंतिम तीन तिथियाँ—त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा—ऐसी तिथियाँ हैं जिनमें स्नान, व्रत और दान करने से सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पुण्य मिलता है।

इन दिनों का स्नान व्यक्ति के जीवन में सात्विक ऊर्जा, शुद्धता और भाग्य वृद्धि का कारण बनता है।

स्कंद पुराण में उल्लेख है कि इन तीन दिनों में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, व्रत, पूजा और दान करने से पूरे माघ मास का फल प्राप्त होता है।


रविपुष्यामृत योग: क्यों है यह योग इतना शुभ?

रविपुष्यामृत योग एक अत्यंत शुभ योग माना जाता है। इस योग में सूर्य और पुष्य नक्षत्र की स्थिति बहुत ही सकारात्मक होती है।

इस दिन किए गए कार्यों का फल सामान्य दिनों की तुलना में अधिक और स्थायी माना जाता है।

यह योग “अक्षय” यानी कभी न खत्म होने वाले पुण्य का प्रतीक माना जाता है।

इस दिन आप दान, व्रत, पूजा, शास्त्र पठन या किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत कर सकते हैं।


माघ मास में प्रातः स्नान का महत्व: क्या सच में मिलता है “सब कुछ”?

माघ मास में प्रातः स्नान केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि जीवन बदल देने वाला उपाय माना जाता है।

माघ मास का स्नान मन, शरीर और आत्मा—तीनों को शुद्ध करता है।

इस स्नान से व्यक्ति को निम्न लाभ मिलने का कहा जाता है:

  • आयु वृद्धि

  • अकाल मृत्यु से रक्षा

  • आरोग्य और मानसिक शांति

  • रूप, बल और सौंदर्य

  • संतान की वृद्धि

  • सदाचरण और उच्च विचार

  • सत्संग की प्राप्ति

  • अक्षय धन की वृद्धि


माघ मास की अंतिम 3 तिथियों में स्नान करने के लाभ 

लाभ (Benefit) लाभ का अर्थ 
आयु वृद्धि माघ मास की अंतिम तिथियों में स्नान से आयु बढ़ती है।
स्वास्थ्य लाभ रोग-व्याधि दूर होकर शरीर स्वस्थ रहता है।
शरीर में बल व ऊर्जा शारीरिक शक्ति और मानसिक ऊर्जा बढ़ती है।
संतान सुख संतान की प्राप्ति और उनके विकास में मदद मिलती है।
सदाचार और नैतिकता व्यक्ति का व्यवहार शुद्ध और श्रेष्ठ बनता है।
सत्संग की प्राप्ति सत्संग की प्राप्ति से मन में शांति और भक्ति बढ़ती है।
उच्च विचार व मानसिक शुद्धि विचार सकारात्मक, ऊँचे और निर्मल बनते हैं।
अक्षय धन वृद्धि धन-समृद्धि और आर्थिक स्थिरता बढ़ती है।

माघ मास की अंतिम 3 तिथियों में क्या-क्या करना चाहिए? 

1) प्रातः स्नान और पवित्रता

इन तीन दिनों में सुबह जल्दी उठकर पवित्र जल से स्नान करें।
स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनें और घर की सफाई करें।

2) व्रत और नियम का पालन

यदि संभव हो तो व्रत रखें।
यदि पूर्ण व्रत संभव नहीं है, तो फलाहार करें और दिन भर सत्य, अहिंसा और ब्रह्मचर्य का पालन करें।

3) दान (दान का विशेष महत्व)

माघ मास में दान का विशेष महत्व है।
गरीब, ब्राह्मण, गुरु, और गाय को दान करने से पुण्य बढ़ता है और दुर्भाग्य दूर होता है।

4) शास्त्र पठन/श्रवण

इन दिनों में ‘गीता, श्री विष्णु सहस्रनाम और भागवत’ का पठन या श्रवण करने से महान पुण्य मिलता है।


माघ मास की अंतिम 3 तिथियों में शास्त्र पठन क्यों लाभकारी है?

इन तिथियों में ‘गीता’, ‘विष्णु सहस्रनाम’ और ‘भागवत’ का पठन/श्रवण करने से:

  • ज्ञान, धैर्य और संयम बढ़ता है

  • मन शांत और सकारात्मक बनता है

  • भक्ति, प्रेम और आत्मिक शुद्धि बढ़ती है


FAQ:

Q1: माघ मास की अंतिम 3 तिथियाँ कौन-कौन सी हैं?
A: त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा।

Q2: माघ मास में स्नान करने से क्या लाभ मिलता है?
A: आयु, स्वास्थ्य, धन, संतान और मानसिक शांति मिलती है।

Q3: रविपुष्यामृत योग क्या होता है?
A: यह शुभ योग है जिसमें सूर्य और पुष्य नक्षत्र की स्थिति बहुत शुभ होती है।

Q4: माघी पूर्णिमा का महत्व क्या है?
A: इस दिन स्नान, दान और सत्संग से भाग्य और समृद्धि बढ़ती है।

Q5: माघ मास की अंतिम 3 तिथियों में क्या करना चाहिए?
A: प्रातः स्नान, व्रत, दान, शास्त्र पठन और सत्संग करना चाहिए।


माघ मास की अंतिम 3 तिथियाँ—त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा—आपके जीवन में नई ऊर्जा, नई शुरुआत और नए अवसर लेकर आती हैं।

यदि आप इन दिनों में स्नान, व्रत, दान और शास्त्र पठन का पालन करते हैं, तो न केवल आत्मिक उन्नति होगी, बल्कि समृद्धि, स्वास्थ्य और भाग्य भी मजबूत होगा।

Astro Prem, Rajasthan की तरफ से आप सभी को माघ मास की हार्दिक शुभकामनाएँ।
भगवान की कृपा से आपका जीवन खुशियों और समृद्धि से भरा रहे। 


यहाँ आपको हर दिन का पंचांग, व्रत और त्योहार की जानकारी सबसे पहले मिलेगी।

yes हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:
 TodayWithPanchang Group Join Link

 

WhatsApp Group Join Now

VIDEO COMING SOON

Leave Message

    आज के नए भजन

    Popular Bhajan With Lyrics

    Stay Connected With Us

    Post Your Comment

    bhajan-with-lyrics-WhatsApp